So when we realize the importance of Zero, you will never want to be hero but the Zero.
शुक्रवार, 19 जुलाई 2013
I Want To Be Zero
So when we realize the importance of Zero, you will never want to be hero but the Zero.
गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013
What is Realization .....
With the blessings of Goddess Saraswati and Param Pujya Gurudevji Maharaj.....
Realization has been defined by several ways till now, in the same series I am also putting some thoughts as par my thinking and knowledge.
First definition is, if one is natural, natural means doing actions as par nature....
Realization is nothing but a position of perfect understanding where one is able to understand the truth of himself as well as the ultimate truth. And what is ultimate truth.......
Ultimate truth in realization, is to know yourself (not your body but is to know about your soul which is the base of your liveliness) because if one is able to know himself then he is able to know about the God and cause of creating everything.
Realization includes, being natural like nature (Let everything happen at it's own, don't try to catch the time in terms of your relations.
Let's understand by an Example of tree
An ultimate truth for the tree is that it has to give shadow to the one who is under the tree even one throws the stone on tree, either to get the fruit or even harm the tree.
A tree is realized because it never asks the leaves or fruit not to fall down when it gets ripen, even leaves are the part of the tree but it does not get so much attached with the leaves or fruit that I won't let you fall down when leaves get their sufficient life or the fruit gets ripen, what we generally do with our family members or connected ones, we always try to get hold on what is not in our hold.
So if you behave like a tree with a perfect understanding, you are realized......
गुरुवार, 1 मार्च 2012
"सेक्स से सम्भोग - और सम्भोग से स्वयमभोग - और स्वयमभोग से महाभोग
मंगलवार, 20 दिसंबर 2011
हम क्यों करे ....
जी हाँ हमारे ऋषि मुनियों ने हमे सिखाया है की जिंदगी का असली लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ खुद को जानना है , पर हम जाने क्यों जब हमारे पास घर गाड़ी बंगलो और हमारे भगवन का आशीर्वाद भी है ..........
हम एक उदाहरण लेते है एक फिल्म का ...
मान लिजियें अमिताभ बच्चन एक फिल्म में डाइरेक्टर के अनुसार एक कुली का रोल करता है तीन घंटे तक वो उसी कुली के भाग्य जो की फिल्म के लेखक ने लिख दिया है , के अनुसार काम करता है | उसका नाम विजय होता है ,उसकी शादी होती है बच्चे और वो सब कुछ जो आपकी जिंदगी में होता है | तो क्या वो उस फिल्म के सरे पात्रो को असल में अपना बेटा , भाई ...... मान लेता है वो तो सिर्फ फिल्म के सफ़र तक ही साथ देते है ना, और फिल्म ख़त्म होने पर वो अपने वास्तविक स्वरुप अमिताभ में आ जाता है ...
जब तक फिल्म चलती है उस पर हो सकता है खून का इल्जाम भी आ जाए उस पर कर्ज भी हो जाएँ , पर कब तक , जब तक फिल्म है उसके बाद तो वो बादशाह अमिताभ.................लेकिन अगर फिल्म के दौरान ही उसके साथ दुर्घटना हो जाती है और वो अपने असली अस्तित्व को ही भूल जाता है तो फिल्म के बाद भी वो विजय कुली बनकर ही जियेगा ........
इसी प्रकार हम भी इस 80 साल की फिल्म में विजय के किरदार में है पर हम विजय के किरदार को ही असली मन लेते है और अपने असली अस्तित्व जो की परम शक्तिमान है उसको जानने की कोशिश ही नहीं करते .........और फिर म्रत्यु के पश्चात् हमे भटकना पड़ता है क्योंकि हमको पता ही नहीं है की हम तो अमिताभ है जिसका अपना स्टेटस है और बहूत कुछ ............................................
इसीलियें हमे इसी जीवन में ये जानना जरूरी है की हम कौन है , ये नाम तो हमे हमे हमारे माता पिता जो की इस 80 साल की फिल्म के डिरेक्टर है उन्होंने दिया है ...........
इसलियें हमे ये जानने की जरूरत है ................और ये सिर्फ और सिर्फ कोई स्वयं सिद्ध आत्मा ही बता सकती है ..........................
सोमवार, 23 मई 2011
आज का विचार
कौन कहता है की सफलता का शोर्ट कट नहीं होता
अरे मै कहता हूँ जो सफलता के शिखर पर है उसके साथ हो लो तो आप भी पलक झपकते ही नंबर 1 हो जायेंगे ....
Date : 23-05-2011
महान बनने की सोच व्यक्ति को उस राह की और अग्रसर करती है और कर्म उसे महान बनाते है .....
शनिवार, 2 अप्रैल 2011
उपवास का मतलब
उपवास का मतलब .......
सोमवार, 14 मार्च 2011
भगवान की साजिश ,
जी हाँ भगवान को ये पता है की इन्सान ही वो सर्वोत्तम कृति है जो मुझे अपने अधीन कर सकता है इसलियें भगवान ने उसे अपनी माया में इतना उलझा दिया है की वो उसमे इतना उलझा रहता है की वो उसे अनदेखा करता है जो सत्य है और उसके पीछे पड़ा रहता है जिसके पीछे भागकर कुछ समय का आनंद ले लेता है पर उसके बाद ? मंजिल मिलने पर क्या ............... दौड़ ख़त्म
रविवार, 7 नवंबर 2010
भगवन क्या है ...................
इसलियें कहता हूँ कि अगर आप किसी मंदिर में भगवन से मिलने जाते है तो आप वाकई में भगवन से मिलने नहीं उनकी शक्तियो से जो कि इस स्रष्टि को बनाने , चलाने , और संहार करने के लियें उस भगवन ने बनायीं है .....समझ रहे हो ना ..........
मंगलवार, 12 अक्टूबर 2010
निर्विकार होना बहूत मुश्किल है पर
इसका मतलब ये नहीं है कि आपको ये सब नहीं करना है आपको ये सब करना है पार इन सब को समझते हुएं ,
आपको एक काम करना है , कुछ नहीं करना है.......................
आसानी से समझ से आने वाली बात नहीं है यह कि क्यो नहीं करना ही क्या नहीं करना ही ......
पर इसे समझने के लियें आपको गहरी समझ होना जरूरी है , जब आप ये समझ जायेंगे तो आपको पता लग जायेंगा कि जिंदगी का असली मकसद क्या है मोक्ष को पाना , भगवान् को पाना और भी बहूत कुछ ............. या फिर निर्विकार हो जाना ......... जहा ना कोई चाहत है , ना कोई तमन्ना है , ना कोई मोक्ष , जन्म, म्रत्यु ,............
बस शुन्य ही ...पर शुन्य भी तो नहीं ही कुछा भी नहीं ......
आप सोचोगे तो फिर क्या मतलब ............
अरे बहूत मतलब ही , ये आपको एक ऐसे मार्ग पर प्रशस्त करेंगे जिस पर आप चलोगे तो साधारण इन्सान बनकर ही पर आप वो जगह , चीज़े पा लोगे जो इन सब से परे ही .............
जय गुरुदेव
मंगलवार, 30 मार्च 2010
शुभ प्राप्ति के लियें शुभेच्छा जरूरी है ........
शुभ प्राप्ति के लियें शुभेच्छा जरूरी है ........
हमेशा शुभ शुभ सोचो तो तुम्हारा शुभ होगा , अमंगल भी मंगल हो जायेगा .....
