शुक्रवार, 19 जुलाई 2013

I Want To Be Zero



I Want To Be Zero
Zero, a small zero or big zero but having a complete existence in comparison with all other numbers. No ending and no starting………………………………nothing but everything ………….....................
Yes I want to be Zero   Yes I want to be Zero   Yes I want to be Zero……………………………………………………………………………………………………..
Because I have understood the importance of Zero.
If we compare it with human being then no ego state because you are not hero but zero. So I want to be zero in order to get the complete existence. Because only complete can give you complete, and everything will be confined in zero either complete emptiness or…………………………………………………….
We may find the complete peace also …………………………….

So when we realize the importance of Zero, you will never want to be hero but the Zero.
Everything has been born from Zero as we are also moving towards Zero only. Because our galaxies are moving and expanding like anything in every direction. And expanding throughout gives you the Zero shape. So I can definitely assure you that if we are Zero then we have EVERYTHING in ourselves. Everything means everything – The complete existence, the complete peace and the complete……………………………………..
Everything is for you and you are for everything…………………………………….
Zero is endless you can’t find it’s end not even start but we need to have a starting point somewhere which needs to be left and then overlapped.

गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013

What is Realization .....


What is Realization......

With the blessings of Goddess Saraswati and Param Pujya Gurudevji Maharaj.....
Realization has been defined by several ways till now, in the same series I  am also putting some thoughts as par my thinking and knowledge.

First definition is, if one is natural, natural means doing actions as par nature....
Realization is nothing but a position of perfect understanding where one is able to understand the truth of himself as well as the ultimate truth. And what is ultimate truth.......

Ultimate truth in realization, is to know yourself (not your body but is to know about your soul which is the base of your liveliness) because if one is able to know himself then he is able to know about the God and cause of creating everything.


Realization includes, being  natural like nature (Let everything happen at it's own, don't try to catch the time in terms of your relations.

Let's understand by an Example of tree

An ultimate truth for the tree is that it has to give shadow to the one who is under the tree even one throws the stone on tree, either to get the fruit or even harm the tree.
A tree is realized because it never asks the leaves or fruit not to fall down when it gets ripen, even leaves are the part of the tree but it does not get so much attached with the leaves or fruit that I won't let you fall down when leaves get their sufficient life or the fruit gets ripen, what we generally do with our family members or connected ones, we always try to get hold on what is not in our hold.

 So if you behave like a tree with a perfect understanding, you are realized......

गुरुवार, 1 मार्च 2012

"सेक्स से सम्भोग - और सम्भोग से स्वयमभोग - और स्वयमभोग से महाभोग


"सेक्स से सम्भोग - और सम्भोग से स्वयमभोग - और स्वयमभोग से महाभोग(महाभोग सिर्फ और सिर्फ आत्मा और जीवात्मा का ही हो सकता है न की शरीर का, जो की भगवन भोलेनाथ की महासमाधि का कारन है )  - और महाभोग से समाधि "ये रास्ता है उस परम सत्य को जानने का ओशोजी के मार्ग से जो की उन्होंने अपनी किताब "सम्भोग से समाधी की और " में लिखा है 
जी हाँ आचार्य रजनीश जी ने जो बात "सम्भोग से समाधि से की और " से बताने की कोशिश की है वो वास्तव में क्या है , ये मै अपने बुद्धि विवेक से बताने की कोशिश कर रहा हूँ कृपया उचित मार्गदर्शन दीजियेगा .....
कब सम्भोग महाभोग बनता है और उस अमरत्व की और ले जाता है | जैसा की आचार्य रजनीश  जी ने ये बताया है की हर एक मर्द में एक औरत और एक औरत में एक मर्द होता है , वो ही आपको सम्पूर्ण संतुष्टि प्रदान कर सकता है न की बहार के स्त्री और पुरुष , ये बात कोई नई नहीं है क्योंकि भगवन  भोलेनाथ ने स्वयं अपने अर्धनारीश्वर रूप में इस बात को सिध्ध किया है और माता पारवती ही वो स्त्री है जो उनके अन्दर समाई हुई है इसलियें उनका सम्भोग सामान्य सम्भोग न रहते हुए महाभोग को प्राप्त कर जाता है (महाभोग में आत्मा और जीवात्मा का मिलन होता है न की शारीर का ) और महाभोग अमर होता है |
तो आचार्य रजनीश जी ने वास्तव में सम्भोग की बात न करते हुए स्वयमभोग की बात  बोली है जो की अपने अन्दर की स्त्री(आत्मा से  जीवात्मा)  या पुरुष  (आत्मा से  जीवात्मा) के साथ करना है अब वो स्वयमभोग हो जाता है पर नासमझ लोग उसे सेक्स समझ लेते है | जब कोई स्त्री या पुरुष आपको अच्छा लगता है तो वो कही न कही आपके अन्दर के स्त्री या पुरुष से सामान हो जाता है पर वो १०० % सामान नहीं हो सकता , क्योंकि सम्पूर्णता तो आपके  स्वयं के अन्दर ही है तो आपको कोई भी बाहर सम्पूर्ण संतुष्ट कर ही नहीं सकता ........

मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

हम क्यों करे ....

हम क्यों करे ....
जी हाँ हमारे ऋषि मुनियों ने हमे सिखाया है की जिंदगी का असली लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ खुद को जानना है , पर हम जाने क्यों जब हमारे पास घर गाड़ी बंगलो और हमारे भगवन का आशीर्वाद भी है ..........
बस यही एक प्रश्न हमे उस सत्य को जानने से रोकता है जिसे जानने के बाद हमारी जिंदगी और भी आसान, सुखमय , और सुलभ हो जाती है और फिर जानने के लियें कुछ नहीं बचता .......
पर हम क्यों करे ......
हम एक उदाहरण लेते है एक फिल्म का ...
मान लिजियें अमिताभ बच्चन  एक फिल्म में डाइरेक्टर के अनुसार एक कुली का रोल करता है तीन घंटे तक वो उसी कुली के भाग्य जो की फिल्म के लेखक ने लिख दिया है , के अनुसार काम करता है | उसका नाम विजय होता है ,उसकी शादी होती है बच्चे और वो सब कुछ जो आपकी जिंदगी में होता है | तो क्या वो उस फिल्म के सरे पात्रो को असल में अपना बेटा , भाई ...... मान लेता है वो तो सिर्फ फिल्म के सफ़र तक ही साथ देते है ना, और फिल्म ख़त्म होने पर वो अपने वास्तविक स्वरुप अमिताभ में आ जाता है ...
जब तक फिल्म चलती है उस पर हो सकता है खून का इल्जाम भी आ जाए उस पर कर्ज भी हो जाएँ , पर कब तक , जब तक फिल्म है उसके बाद तो वो बादशाह अमिताभ.................लेकिन अगर फिल्म के दौरान ही उसके साथ दुर्घटना हो जाती है और वो अपने असली अस्तित्व को ही भूल जाता है तो फिल्म के बाद भी वो विजय कुली बनकर ही जियेगा ........
इसी प्रकार हम भी इस 80 साल की फिल्म में विजय के किरदार में है पर हम विजय के किरदार  को ही असली मन लेते है और अपने असली अस्तित्व जो की परम शक्तिमान है उसको जानने की कोशिश ही नहीं करते .........और फिर म्रत्यु के पश्चात् हमे भटकना पड़ता है क्योंकि हमको पता ही नहीं है की हम तो अमिताभ है जिसका अपना स्टेटस है और बहूत कुछ ............................................
इसीलियें हमे इसी जीवन में ये जानना जरूरी है की हम कौन है , ये नाम तो हमे हमे हमारे माता पिता जो की इस 80  साल की फिल्म के डिरेक्टर है उन्होंने दिया है ...........
इसलियें हमे ये जानने की जरूरत है ................और ये सिर्फ और सिर्फ कोई स्वयं सिद्ध आत्मा ही बता सकती है ..........................

सोमवार, 23 मई 2011

आज का विचार

आज का विचार 
Date : 24-05-2011
कौन कहता है की सफलता का शोर्ट कट  नहीं होता
अरे मै कहता हूँ जो सफलता के शिखर पर है उसके साथ हो लो तो आप भी पलक झपकते ही नंबर 1 हो जायेंगे ....

Date : 23-05-2011
महान बनने की सोच व्यक्ति को उस राह की और अग्रसर करती है और कर्म उसे महान बनाते है .....

शनिवार, 2 अप्रैल 2011

उपवास का मतलब



सद्गुरु की कृपा से
उपवास का मतलब .......
जी हाँ आज तक आपने उपवास मतलब सिर्फ अपने आप को खाने से रोकना समझा है लेकिन मैंने अपने सद्गुरु की कृपा से इसको दो प्रकार से परिभाषित किया है ...
१. उपवास मतलब उस इष्ट की " उपस्थिति में वास करना जिसका आपने उपवास किया है ". मतलब आपको हर समय उस अपने इष्ट की उपस्थिति का एहसास होना उस दिन की वो आपके पास है और आपको उसकी आराधना करना है इस तरह से की वो पल पल आपको देख रहा है इसलियें आप जो भी कम करे उस दिन वो इस तरह से हो की वो उसकी नज़रो में आपका अच्छा स्थान बनायें "
२. उपवास मतलब " उस परम सत्ता के विराट अस्तित्व का उपभाग बनकर वास करना" मतलब जब कोई इस तरह उपवास का मतलब समझकर उपवास करता है तो वो भी उस दिन उतना ही पवित्र हो जाता है जितना की वो परम सत्य.

सोमवार, 14 मार्च 2011

भगवान की साजिश ,

भगवान की साजिश ,

जी हाँ भगवान को ये पता है की इन्सान ही वो सर्वोत्तम कृति है जो मुझे अपने अधीन कर सकता है इसलियें भगवान ने उसे अपनी माया में इतना उलझा दिया है की वो उसमे इतना उलझा रहता है की वो उसे अनदेखा करता है जो सत्य है और उसके पीछे पड़ा रहता है जिसके पीछे भागकर कुछ समय का आनंद ले लेता है पर उसके बाद ? मंजिल मिलने पर क्या ............... दौड़ ख़त्म
इसलियें जब इन्सान असली दौड़ में दौड़ना चाहता है तो माया उसे अपनी नकली दौड़ में खीच लेती है और उसको लगता है की अरे वाह मै सबसे आगे दौड़ रहा हूँ वाकई में तो भगवान उसे अपनी दौड़ में सबसे पीछे कर देता है दुनिया की शोहरत और सफलता देकर .....
समझे न भगवान की साजिश को ....
इसलियें भगवान् से कभी दुनिया की सफलता तो मांगो ही मत वो तो ऐसे ही दे देगा तभी तो कभी कभी  बिना  मांगे सब कुछ  मिल जाता है तो इसमें भगवन का ही फायदा है

रविवार, 7 नवंबर 2010

भगवन क्या है ...................

"भगवन" क्या है ................... जी हाँ मै यहाँ पर आपको ये बताने का प्रयास करना चाह  रहा हूँ कि "भगवन" क्या है , कौन है । अनादी कल से एक सर्व साधारण को विभिन्न धर्मं गुरुओं के माध्यम से पता चलता आया है कि भगवन क्या है पर क्या आपने कभी गौर किया है कि जो भगवन कि कल्पना आपने उन जानकारियो के आधार पर कर ली है क्या वाकई में वो ही भगवन है गौर कीजियेगा मै "भगवन " कि बात कर रहा हु ..... किसी ने बोल दिया कि चार हाथ जिसके हो , जिसके गले में सापो कि माला हो या जो शेर पर सवार हो या फिर और कोई ..... या जो भी चमत्कार करें ,हाँ वो भगवन है , पर अगर मैं ये कहूँ कि वो भगवन नहीं जिसकी मै बात कर रहा हूँ वो तो भगवन कि आदि शक्तिया है जो कि उस भगवन के बराबर है क्योंकि वो उस भगवन के बाद आती है जिसकी मै बात कर रहा हूँ और वो भगवन और कुछ नहीं है "प्रक्र्तिस्थिता" है जो आप सब में विराजमान है मतलब उस निराकार निर्गुण सत्ता जहाँ ना कोई ब्रह्मा , विष्णु , महेश है , ना कोई रात  है ना कोई दिन है , ना कोई प्रश्न और ना ही उत्तर है जहाँ कुछ होना या ना होना भी नहीं है ...... वो है भगवन.
इसलियें  कहता हूँ  कि अगर आप किसी मंदिर में भगवन से मिलने जाते है तो आप वाकई में भगवन से मिलने नहीं उनकी शक्तियो से जो कि इस स्रष्टि को बनाने , चलाने , और संहार करने के लियें उस भगवन ने बनायीं है .....समझ रहे हो ना ..........

मंगलवार, 12 अक्टूबर 2010

निर्विकार होना बहूत मुश्किल है पर

निर्विकार होना बहूत मुश्किल है पर ........... हो सकता है ये मेरी आखरी कृति हो एक लेवल पर (मेरे लियें ) ........ पर दुनिया के लियें मुझे या मेरे जैसे अन्य लोगो को तब तक लिखना पड़ेगा तब तक वो निर्विकार कि स्थिति को ना पा जायें। निर्विकार स्थिति को स्पष्ठ करना चाहूँगा जहाँ ना कोई मेरा है , ना कोई तेरा है , ना कोई भगवान है ना कोई मनुष्य है , ना कोई लेना है , ना कोई देना है , ना कोई गुरु है , ना कोई शिष्य है , ना कोई मौत है ना कोई जीवन है , ना कोई प्रश्न है , ना कोई जवाब है , ना कोई पूछने वाला है , ना कोई बताने वाला है ...........

इसका मतलब ये नहीं है कि आपको ये सब नहीं करना है आपको ये सब करना है पार इन सब को समझते हुएं ,

आपको एक काम करना है , कुछ नहीं करना है.......................

आसानी से समझ से आने वाली बात नहीं है यह कि क्यो नहीं करना ही क्या नहीं करना ही ......

पर इसे समझने के लियें आपको गहरी समझ होना जरूरी है , जब आप ये समझ जायेंगे तो आपको पता लग जायेंगा कि जिंदगी का असली मकसद क्या है मोक्ष को पाना , भगवान् को पाना और भी बहूत कुछ ............. या फिर निर्विकार हो जाना ......... जहा ना कोई चाहत है , ना कोई तमन्ना है , ना कोई मोक्ष , जन्म, म्रत्यु ,............

बस शुन्य ही ...पर शुन्य भी तो नहीं ही कुछा भी नहीं ......

आप सोचोगे तो फिर क्या मतलब ............

अरे बहूत मतलब ही , ये आपको एक ऐसे मार्ग पर प्रशस्त करेंगे जिस पर आप चलोगे तो साधारण इन्सान बनकर ही पर आप वो जगह , चीज़े पा लोगे जो इन सब से परे ही .............

जय गुरुदेव

मंगलवार, 30 मार्च 2010

शुभ प्राप्ति के लियें शुभेच्छा जरूरी है ........

शुभ प्राप्ति के लियें शुभेच्छा जरूरी है ........

हमेशा शुभ शुभ सोचो तो तुम्हारा शुभ होगा , अमंगल भी मंगल हो जायेगा .....

बुधवार, 6 जनवरी 2010

एक एक पल बीत रहा है ....

एक एक पल बीत रहा है .... क्या आपको इसका अंदाजा है की एक एक पल बीतने के साथ साथ ही आपके जिंदगी के दिन कम होते जा रहे है आपइसकी गंभीरता की और ध्यान नहीं दे रहे है क्योंकि आप सिक्के का दूसरा पहलु देख ही नहीं रहे है , क्योंकि आपको भुलावे में रहने की आदत हो गयी है , पर सत्य तो यही है की वो भी एक यथार्थ है , आप क्या समझ रहे है क़ि आप जाग रहे है परन्तु आप असल में तो सो रहे है क्योंकि असल में तो जो अपने आप को जानते हुए कर्म करता है वो ही असल में जागा हुआ है ............................. अपने आप को जानने क़ि भी कई मायने है , आप सभी लोग अपने आप को जानते है क़ि मेरा नाम ये है , मेरा खानदान ये है ......शायद और कुछ थोडा । पर सिर्फ ये ही नहीं काफी है आपको अपने आप को उस अध्यात्मिक स्तर तक जानने क़ि आवश्यकता है ....

गुरुवार, 31 दिसंबर 2009

अग्निहोत्र अग्निहोत्र अग्निहोत्र अग्निहोत्र अग्निहोत्र

अग्निहोत्र अग्निहोत्र अग्निहोत्र अग्निहोत्र अग्निहोत्र ................. जी हा यही है वो उर्जा का सूर्य जो मुर्दे में जान दल सकता है और हर वो काम कर सकता है जो कि आपकी सोच के भी परे है क्योंकि अग्निहोत्र काजो टाइम है वो है सूर्योदय और सूर्यास्त का , जो कि एक ऐसा टाइम है जब दो विपरीत चीज़े एक दुसरे से मिलती हैऔर इसी टाइम जो उर्जा का विनिमय होता है वो एक सूर्य नहीं ऐसे हजारो सूर्यो कि उर्जा के बराबर होती है सुक्ष्मलेवल पर जिसका आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते । वैज्ञानिक भी उस उर्जा का जिक्र तो करते है सुक्ष्म लेवल पर वो सिर्फ नाभिकीय संलयन तक ही सिमित है जो कि एक परमाणु के दुसरे परमाणु के साथ क्रिया करने पर ही निकलती है .................. इसीलियें हिन्दू संस्कृति में विवाह लग्न गोधुली बेला यानि कि शाम के समय लगाये जाते है क्योंकि इस समय दूल्हा दुल्हन का हाथ एक दुसरे के हाथ में देने से जो उर्जा मिलती है वो उस अध्यात्मिक शक्ति के बराबर होती है जिसका योगी मुनि लोग गुणगान करते है ............ ॐ साईं ..........

सोमवार, 28 दिसंबर 2009

एक तीव्र इच्छा उठती है ....................

एक तीव्र इच्छा उठती है .................... जब कभी आपकी कुछ खाने कि इच्छा होती है तो आप खा लेते है या सोने कि इच्छा होती है तो आप सो लेते है क्योंकि ये सभी आपके कण्ट्रोल में है पर उन बातो का क्यो जो आपके कण्ट्रोल में नहीं है क्योंकि समय बड़ा बलवान है आज जो आपके कण्ट्रोल है हो सकता है कल आपके कण्ट्रोल में नहीं हो. तब आप मन मसोक कर रह जाते हो पर आपका मन , आपकी भावनाए आपको हर वो गलत काम करने के लियें मजबूर करेंगे , और हो सकता है आपकी बात बिगड़ जाएँ ..................तो फिर क्या करें , वक्त रहते अगर ये बात समझ नहीं आयी तो .................

शुक्रवार, 25 दिसंबर 2009

आप किसे संतुष्ट कर रहे हो

आप किसे संतुष्ट कर रहे हो .................... आपने कभी सोचा है कि आपको अगर एक दिन खाना नहीं मिले तो आप कितने व्याकुल हो जाते है और थोड़ी देर पानी नहीं मिले तो आपकी क्यो हालत हो जाती है क्योंकि ये आपके शरीर को चलाने के लियें जरूरी है , पर आपका इन पर कण्ट्रोल नहीं है , इनका आप पर कण्ट्रोल है ये नहीं मिले तो आप अपना पराया सब भूल जाते है । आपका ज्यादातर समय तो अपने शारीर कि आवश्यकताओ को पूरा करने में चला जाता है तो फिर आप अध्यात्म कि तरफ कब ध्यान दोगे जो कि वास्तव में जरूरी है

गुरुवार, 24 दिसंबर 2009

कल बीत गया , वर्तमान आज है जो अभी भूत हो जायेगा ...

कल बीत गया , वर्तमान आज है जो अभी भूत हो जायेगा ... अरे तो आप कहा ई इस भूत , वर्तमान के चक्कर में । कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है की मेरा क्या होगा अब, अगले पल या तो मै जिन्दा रहूँगा या उस अटल सत्य को पा जाऊंगा जिसे मौत कहते है । पर उसके बाद ? यह सब आपके हाथ में हो सकता है जो की वास्तव में सत्य है अभी जो आप सत्य मान रहे है वो तो एक सपना है , झूठ है छलावा है , सपना तो तब टूटेगा जब आप उस अटल सत्य के साक्षी होंगे , लेकिन तब आपके पास कोई चारानहीं होगा ......

रविवार, 20 दिसंबर 2009

क्यो सच्चे मन से माँगने के लियें उस मालिक के दर पर जाने कि जरुरत है ॥

क्यो सच्चे मन से माँगने के लियें उस मालिक के दर पर जाने कि जरुरत है ॥ अरे मै कहता हूँ अगर सच्चे मन से ही मांगना है तो वो तो यही पर बैठे बैठे ही मिल सकता है क्योंकि आप में भी तो परमात्मा का वास है और सच्चे मन से मांगी हुई मुराद तो उस के दर तक जाती है तो फिर उसके दर पर जाने कि जरुरत ही नहीं है अगर सच्चा मन है तो , और अगर झूठा मन है तो दर पर भी जाकर कुछ नहीं मिलता। क्या आप अपने अन्दर के परमात्मा को इतना छोटा समझते हो कि वो आप कि मुराद पूरी नहीं कर सकता , अरे आत्मा भी तो परमात्मा का ही अंश है ........

शनिवार, 19 दिसंबर 2009

क्या आपने अपने आखरी वक़्त कि प्लानिंग कर ली है

क्या आपने अपने आखरी वक़्त कि प्लानिंग कर ली है ......... नहीं , तो अभी शुरू कीजिये , पर आप करेंगे क्या , इसके लियें निचे वाली ब्लॉग इंट्री पढिये.... " आपका विनाश हो इसके पहले यह है जरूरी....."

शुक्रवार, 18 दिसंबर 2009

आज के बाद कल .....

आज के बाद कल ..... और उसके बाद एक और कल , इसी प्रकार कितने ही कल निकल चुके है और कितने ही कल निकल जायेंगे। पर तब क्यो करोगे जब एक आखरी कल आयेंगा , जाहिर है कुछ नहीं ... क्योंकि आपको पता ही नहीं है कि आखरी कल आने पर क्या करना है , कभी हमने प्रयास ही नहीं किया। प्रयास क्यों करे, हम अच्छे से जीवन जी तो रहे है , आज हमारे पास सब कुछ है और जो नहीं है उसके लियें प्रयास कर रहे है बस और क्या चाहियें .......... पर सिर्फ यही काफी नहीं है भाई क्योंकि असल जिंदगी तो उसके बाद है यह सब तो छलावा है जो आपके कण्ट्रोल में नहीं है , आज जो आपके पास है कल वो किसी और के पास होगा तो फिर क्यों ना उस असल जिंदगी के लियें प्रयास किया जाएँ जो कि वास्तव में आने वाली है ................. गुरुदेव भला करें .....

सत्य क्या है ....

सत्य क्या है .... सत्य वो है जिसे साबित करने कि जरूरत ना पड़े , सत्य वो है जिसे आप देखकर, जानकर भी अनजान बनने कि कोशिश करते है , सच मौत है जिस पर आपका जोर नहीं चलता , आप जिस दुनिया में जी रहे है वो असत्य है इसका दूसरा पहलू ही सत्य है जिसकी तरफ हम देखना नहीं चाहते क्यों , क्योंकि वो आपको आपके झूठ से परिचय करता है , जिसके पास सत्य कि शक्ति है उसके पास ही असली शक्ति है , किसी के पास बहूत सारे पैसे आ जाने पर या कुछ एक व्यक्तियों पर हुक्म चला लेने को शक्तिशाली नहीं कहते , अरे शक्तिशाली तो वो है जो मुर्दे में भी जान डाल दे , अनहोनी को होनी कर दे या होनी को अनहोनी ......................... समझ रहे हो ना , तो फिर किस भुलावे में जी रहे हो ............ मै ये नहीं कहता कि कर्म मत करो या सन्यास ले लो , अरे कर्म करते हुए ही जिसने सत्य को पा लिया वही तो शक्तिशाली है...

गुरुवार, 3 दिसंबर 2009

आपका विनाश हो इसके पहले यह जरूरी है ...........

आपका विनाश हो इसके पहले यह जरूरी है ........... है कि आप अपना बसेरा कही और ढूंढ़ ले वरना आपको भटकना पड़ेगा कैसे ? बात पर जरा ध्यान दीजियें .......... अगर आपको कोई २४ घंटे का अल्टीमेटम दे तो आप पहले क्या करोगे ......... आप अपनी ही लोकेलिटी का एक नया घर खोजोगे जिसमे आप के लेवल के या आपसे स्टेंडर्ड लोग रहते हो , आपकी ही जाती, समाज के लोग रहते हो , न की आपसे छोटे रहन सहन वाले या फिर दूसरी जाती या समाज के लोग रहते हो? क्यो ठीक कहा न मैंने ? तो फिर आपको ये बात क्यो नही समझ में आती की जब इस मानव देह को पता नही अल्टीमेटम मिले या न मिले और इसे खाली करने का टाइम आयेंगा तो आप कौन सी लोकेलिटी में अपना नया घर यानि की कौन सी नयी देह खोजोगे (मानव या उससे ऊँची( देव) या फिर दूसरी गिरी हुई कुत्ते ,बिल्ली , सूअर ..............) तो फिर जैसे आपने अपना एक मकान होते हुए भी दुसरे मकान बना रखे है या उनकी व्यवस्था कर रखी है की वक्त आने पर दुसरे अच्छे घर में चले जायेंगे तो फिर ये तो जीवन के उस सत्य की बात हो रही है जो की मरने के बाद साथ जाता है ... राम नाम सत्य है .....यही बोला जाता है न........................... तो फिर ऐसे घर की तलाश तो करनी ही पड़ेंगी ........ तो मुझे बताइए अगर आप भी तलाश करना चाहते है .......प्लीज़ अच्छा अगर ये बात समझ नही आती है तो एक और बात सुनियें एक हवाई जहाज उडान भरता है तो उसे पता होता है की उसे कहा लेंड करना है और अगर वह बिना पता किए उड़ जायें तो उसे क्रेश होना पड़ता है या फिर कही गन्दी जगह भी लेंड कर सकता है (मतलब कुत्ते बिल्ली की बात कर रहा हूँ , अगर आपका जिव तत्त्व ये बिना जाने ही आपका शरीर छोड़ देता है की मुझे अगला जन्म इन्सान या उससे अच्छा कोई और देह हो उसमे लेना है तो ठीक है लेकिन अगर बिना पता किए अगर म्रत्यु आ गयी तो फिर कुत्ते , बिल्ली की देह में लेंड करना पड़ेंगा ) समझ रहे हो न .................. क्योंकि हवाई जहाज तो वापस भी आ सकता है लेकिन आपकी आत्मा एक बार बहार निकलने के बाद वापस नही आ सकती .......ॐ साईं राम , ॐ श्री गुरुदेव दत्त

शुक्रवार, 13 नवंबर 2009

शिव तत्त्व ही बीज तत्त्व है ...............

शिव तत्त्व ही बीज तत्त्व है ............... भोले बाबा जिन्हें सब कहते है वो भोले बाबा आख़िर किस धुन में रमे हुए है , वो क्या है जिसके कारण वो विश भी पी गए ........................... क्यो वो हजारो सालो की समाधी में रमे रहते है , इसका जवाब तो वो ही दे सकता है जिसे समाधी का टेस्ट लगा हुआ है , और शायद वह मुझे भी लग गया है लेकिन उस हद तक नही ....

शनिवार, 24 अक्टूबर 2009

कोई तो मेरी कसक समझो ......

कोई तो मेरी कसक समझो ...... हे प्रभु , हे मालिक ये मेरे दिल की कसक है जिसे मैं दुनिया वालो को समझाने कि कोशिश कर रहा हूँ ... कुछ तो है जिसे मैंने पा लिया है पर हो सकता है मुझे बताते नही आ रहा है ... यह सब अध्यात्मिक बातें सिर्फ़ दुनिया वालो को बताने के लिए है मै कुछ और भी चाहता हूँ ............ बस ६ महीने और आप दुनिया के उस सर्वोच्च यात्रा के साक्षी होंगे जिसके लियें आपका जन्म हुआ है...... असली यात्रा जो की सत्य है उस अनंत कोटि परमात्मा के मिलन की जिसको पाने का सपना तो सब देखते हैं लेकिन कुछ लोग ही होते है जो उस परम पिता परमेश्वर की कृपा से उसे पुरा कर पाते है....

समय बड़ा बलवान है

समय बड़ा बलवान है ..... सबसे शक्तिशाली कौन है जिसके पास पैसा है , हथियार है , सत्ता है ........ हाँ जिसके पास ये सब है वो यह गलतफ़हमी जरूर पल सकता है की वो शक्तिशाली है .....पर आज जो उसके पास है कल उसके पास होगी या नही ...... यह उसे सोचने की जरूरत है ... ये बाते सुनाने में तो इतनी सिंपल है फिर भी लोगो के समझ में नही आती , बाबुजी यही तो माया का परदा है , अगर सबको समझ में आने लग जायेगी तो सब लोग उस अध्यात्मिक उन्नति की और अग्रसर नही हो जायेंगे ? ॐ साईं ............भगवन सबको समझने की शक्ति दे उस अध्यात्मिक सफर की ....अल्लाह मालिक साईं मालिक .......

सोमवार, 19 अक्टूबर 2009

ये मेरे दिल की कसक है....

ये मेरे दिल की कसक है.... और शायद हर एक उस व्यक्ति की है जिसे ये पता है की उसके हाथ में तो कुछ भी नही है वो तो एक कठपुतली मात्र है , सुनाने में तो ये बाते जानी पहचानी सी लगती है लेकिन अगर कोई भी इस पर थोड़ा सा ध्यान दे तो ये बताती है की यही जीवन का सत्य है , आप किस अभिमान में जी रहे है जो कुछ आपका आज है कल किसी और का होगा ...... फिर इस झूठे अभिमान से क्या ? मौत एक अटल सत्य है जिसे टला नही जा सकता , फिर ये किस बात का गुरुर , आप बिता हुआ एक पल भी वापस नही ला सकते तो फिर किस अभिमान में जी रहे है क्या आपके पास गाड़ी है बंगला है .....बस इसी अभिमान में .....ये सब तो आज तुम्हारे पास है कल नही होगा तो किस पर अभिमान करोगे ......जरा समझो तो सही .......बाकि साईं मालिक ........ जय बम भोले .........

रविवार, 18 अक्टूबर 2009

बस आपके जीवन के छः महीने दीजिये .......

बस आपके जीवन के छः महीने दीजिये ....... जी हाँ बस छः महीने और मेरे गुरूजी आपको इस जीवन की उन उचाईयों तक पहुँचा देंगे जहा पर होना ही इस जीवन का मूल उद्देश्य है ........जी आप विश्वास किजीयें कोई है जिसने यह सब कुछ पा लिया है और मन में कसक है की अब यह दुसरो को कैसे दू ....... और वो भी बिल्कुल सहज तरीके से और सरल तरीके से , आप इंदौर आइयें और बस कनाडिया रोड स्थित चैतन्य आश्रम जाईयें, आप विश्वास मानिये आपको अध्यात्मिक गुरु मिलेंगे जो की आपके जीवन का मूल्य समझा देंगे और अगर आप अपने ६ महीने उन्हें दान कर देंगे तो आप भी जीवन की उन बुलंदियों तक पहुच जायेंगे जो की किसी भी नार्मल व्यक्ति के लियें असंभव है बिना सद्गुरु की कृपा के .......... जय साईनाथ .....

मेरी बात पर ध्यान दो .........

मेरी बात पर ध्यान दो ................... वैराग्य क्या है ? वैराग्य उत्पन्न होना मतलब सांसारिक वस्तुओ से मोह का नष्ट होना, फिर वो चाहे काम, क्रोध,लोभ, मोह ही क्यो न हो... और वैराग्य जीवन के किसी भी चरण में उत्पन्न हो सकता है और यह उस परम पिता परमेश्वर की कृपा से ही होता है क्योंकि वैराग्य ही उस परम पिता परमेश्वर के निकट जाने का रास्ता है .....

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2009

यह सब छलावा है............

यह सब छलावा है............ बस एक पल , हाँ बस एक पल आपको ये साबित करने के लियें काफी है....की यह सब माया है.....रिश्ते, नाते, मोह , माया ,................फ़िर क्या करोगे जब ये पता चलेगा और तुम भी मानने लगोगे की ये तो वाकई में छलावा है सत्य तोसिर्फ़ म्रत्यु है , वो परम सत्ता है, वो मालिक है जिसने सत्य बनाया हैं .......................... मैं ख़ुद भी इसी माया मैं उलझा हुआ हूँ... पर कभी कभी सोचता हूँ तो पाता हूँ हाँ सही में...........

बुधवार, 30 सितंबर 2009

एक अनोखा सुकून

एक अनोखा सुकून ............ जी हाँ जिस सुकून की मैं बात कर रहा हूँ वह है रोज जलाभिषेक करने का मन्दिर में .............. महाम्रत्युन्जय मंत्र के जाप का , हनुमान चालीसा पढने का , संकटमोचन हनुमानाष्टक पड़ने का ................. एक अनोखा सुकून................ आप विश्वास मानिये और करके देखियें एक अध्यात्मिक शान्ति मिलेगी ...........

शुक्रवार, 18 सितंबर 2009

मैं कौन हूँ ....................

मैं कौन हूँ .................... यह एक सवाल है जिसका जानना बहूत जरूरी है हर इन्सान की जिंदगी में, मैं मतलब अहंकार ................. जब आप बात करते हैं "मैं" की तो आप हमेशा इस शरीर की बात करते हैं जो भी आपका नाम होता है..... जैसे राम ने बोला ये ब्लॉग राम ने बनाया, तो राम ने जिस राम की बात कहीं वो उस दो पैर , दो आँख , दो कान वाले एक शरीर की बात की ........... पर असलियत में तो राम, राम का शारीर नही हैं वह तो एक चोला है, जो की उस आत्मा ने इस जीवन चक्र कोचलने के लियें धारण करने के लियें धारण किया हैं। राम तो उसी परमात्मा का अंश है ............... इसीलियें जब आप अपनी बात करें तो हमेशा ये ध्यान रखें की आप आपके शरीर की बात नहीं कर रहे अपितु उस परम आत्मा की बात कर रहें हैं ..................... ॐ साईं राम ..................